कुमार नरेन्द्र सिंहपिछले कुछ दशकों से 'इंडियन नॉलेज सिस्टम' (आईकेएस) नाम का एक प्रोजेक्ट पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। इस बात स
क्या आपने कोई ऐसी पेंटिंग देखी है जिसके भीतर से कोई तेज रोशनी फूटती हो...लगता है चित्र के फ्रेम के भीतर कोई बल्ब जल रहा हो। त्रिवेणी कला संगम की गैलरी में देवास के दिवंगत चित्रकार अफ़ज़ल पठान के चित्रों को देखकर ऐसा लगता है कि उनकी पेंटिंग से कोई रोशनी निकल रही
आशुतोष राणा कराएँगे देश के मशहूर मंदिरों के दुर्लभ दर्शन
अयोध्या इन दिनों एक बार फिर ख़ासी चर्चा में है... राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट.. कहावत तो आपने सुनी ही होगी। तो साहब, राम के नाम पर पहले सत्ता और अब उनके नाम पर कई हज़ार करोड़ रुपए की चोरी.. मुद्दा गरम है, लेकिन इसी बीच राम की इसी आस्था का एक बेहद आधुनिक तकनीक से लैस व्यावसायिक अभियान भी सामने आया है... खासकर उनके लिए जिनके भीतर शायद मंदिर के दर्शन करने की चाहत है, लेकिन वो इस राजनीतिक
राम मंदिर में करोड़ों की चंदा चोरी और चोर हुए चंपत, इसे चोरी कहें या डकैती... ऐसे में जांच के लिए एक और एसआईटी... सियासत का ये नया खेल, क्या है ये एसआईटी...जाने माने पत्रकार और व्यंग्यकार अनिल त्रिवेदी
चूंचूं अंकल इनदिनों गुमसुम हैं। मन बहुत उद्गिन और व्यथ
खुले बाजार का दौर है। आजकल हाल यह है कि बेचने वाले ग्राहक खोज-खोजकर माल थमाने में लगे हैं। बड़ा टफ कंपटीशन है, भाई। ग्राहकों को घर-घर जाकर पकड़ना पड़ रहा है। लोगों को नींद से जगा-जगाकर माल बेचा जा रहा है। बेचने वाले बताते हैं कि भैया उठो, खरीद लो और तब तक न रुको जब तक घर न भर जाए। जनता जनार्दन बेचारी झांसे में आ रही है और वह दिन-रात खरीदारी में जुटी है। विक्रेता समझा रहे हैं-मु
मुम्बई में 5 लाख रुपए में एनएसडी छात्रों को रंगमंच का प्रशिक्षण देगाबच्चों को रंगमंच में प्रशिक्षित करने के लिए दिल्ली में रंग बाग शुरू
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्र
कर में अगर कमल हो तो फिर कहना ही क्या, आजकल हर कोई अपने कर में कमल को पकड़ने में लगा है...आख़िर इस कमल की महिमा जो अपरंपार है... अनिल त्रिवेदी का ताज़ा व्यंग्य
सेकंड क्लास में पढ़ रही मेरी पोती ने आज अचानक पूछा -बाबा, कर कमल क्या होता है? मैंने उसे बताया कि हाथों को कर कमल कहते हैं। पोती हंसी- हाथों को कर कमल कहते हैं? इसमें कमल कहां से आ गया? मैंने उसे समझाने की कोशिश क
यह ज़माना मीर का और मुस्तक़बिल भी –प्रोफ़ेसर अनीसुर्रहमान
फारूक़ी ने बताई मीर तक़ी मीक की अहमियत
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The Essensial Mir पर चर्चा
उर्दू के महान शायर मीर तक़ी मीर मिर्ज़ा ग़ालिब से कम बड़े शायर नहीं थे। ग़ालिब ने तो खुद लिखा है -
रेख्ता के तुम ही नहीं थे उस्ताद ग़ालिब, कहते हैं अहले ज़माने में कोई मीर भी था
लेकिन आज का
तीन साहित्यकारों को साहित्य अकादेमी ने महत्तर सदस्यता दी
नई दिल्ली; 30 मार्च 2026 - साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने रवींद्र भवन परिसर में आयोजित एक भव्य समारोह में 30 मार्च से 4 अप्रैल तक चलने वाले ‘साहित्योत्सव-2026’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर भारत