बंगाल ने नटी विनोदिनी की तरह गौहर जान को क्यों नहीं अपनाया
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October 2, 2026

कोलकाता, 2 अक्टूबर। बंगाल में नटी विनोदिनी को एक कल्चरल आइकॉन माना जाता है लेकिन गौहर जान को वह दर्जा नहीं मिला जबकि उनक़ा कद नटी विनोदिनà

मौजूदा खतरे से निपटने का एकमात्र तरीका जनांदोलन – मदन कश्यप
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September 29, 2026

फासीवादी सत्ता संस्कृति के खिलाफ संघर्ष के संकल्प के साथ जसम बिहार का सम्मेलन सम्पन्न। जितेन्द्र कुमार अध्यक्ष तथा दीपक सिन्हा सचिव चुने गए। कवि कौशल किशोर ने कहा - बुलडोजर फासीवाद का प्रतीक Read More

…और अब ‘हमारी कहानियाँ, हमारा भविष्य’ थीम पर ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल
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September 24, 2026

नई दिल्ली।  भारत में हुए ब्रिक्स समिट के बाद संस्कृति मंत्रालय ब्रिक्स में अपनी अध्यक्षता के तहत ‘ब्रिक्स थिएटर फेस्टिवल’ 2026 के साथ एक और महत्वपूर्ण महोत्सव करने जा रहा है। यह महोत्सव 12 से 14 अक्टूबर, 2026 तक नई दिल्ली में होगा और इसमें भारत, थाईलैंड, इंडोनेशिया, रूस, वियà

जीडीपी पर एंकर का इतिहास ज्ञान – मिर्ची खा क्यों रहे हो …?
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September 5, 2026

समसामयिक सवालों पर अपनी तीखी नज़र डालने वाले रचनाकार आलोक यात्री ने देख तमाशा दुनिया का कॉलम की शुरुआत की थी... कुछ साल पहले तक लगातार आलोक यात्री ने इस सिलसिले का बरकरार रखा.. फिर इसे आगे बढ़ाने का काम किया अनिल त्रिवेदी ने... और अब एक बार फिर आपके सामने है आलोक यात्री की ताज़ा रचना... देश की मुख्यधारा की मीडिया कहे जाने वाले चैनलों और उनके महान एंकरों के à¤

सतीश आनंद ने बदला पटना का रंगमंच और रंग बोध
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August 30, 2026

सतीश आनंद का जाना बेशक हिन्दी रंगमंच और खासकर पटना और बिहार के रंगमंच के लिए एक बड़ा शून्य पैदा करता है... बेशक तीश आनंद ने उस दौर में पटना में रंगमंच को एक नई दिशा दी और रंगकर्मियों को एक बड़ा मंच दिया जब साहित्य संस्कृति और खासकर रंगमंच एक मुश्किल दौर में था, दर्शकों को मंच तक लाना एक चुनौती थी और इसे समाज से जोड़कर एक सार्थक मिशन की तरह आगे ले जाना भी आसान नहीं था.. वो दौर था जब कालीदास

पटना में शिवपूजन सहाय की याद- ‘देहाती दुनिया’ के सौ साल
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August 11, 2026

'शिवपूजन सहाय का उपन्यास देहाती दुनिया बिहार के औपनिवेशिक गाँव का एक सामाजिक सांस्कृतिक दस्तावेज़ है'   पटना 11 अगस्त। आचार्य शà

गंदी गालियां, अच्छी गालियां
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August 5, 2026

देख तमाशा दुनिया का... हमारे इस खास सेग्मेंट में इस बार वरिष्ठ पत्रकार और व्यंग्यकार अनिल त्रिवेदी ने गालियों पर छिड़ी दिलचस्प बहसों और सियासत पर अपने निशाने पर ले रहे हैं .. तो पढ़िए उनका ये दिलचस्प व्यंग्य --

चाय की दुकान पर चर्चा छिड़ी है। बहस के लिए रोज कोई न कोई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दा मिल ही जाता है। गांव से लेकर दिल्ली की राजनीति तक और गलà

बगल के कमरे में कोई पिट रहा है!
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August 4, 2026

अरुंधति रॉय अगर कुछ लिखती हैं तो उसके कुछ मायने होते हैं... बेशक उनका लेखन उनके निजी जीवन और अनुभवों से फूटने वाली वह अभिव्यक्ति है जो सीधे सीधे मौजूदा समाज और रिश्तों की जटिलताओं के साथ साथ समकालीन राजनीति और खासकर कट्टरवादी सियासत करने वालों पर चोट करती है... ज़ाहिर है दक्षिणपंथी ताकतों की नज़र में वो हमेशा खटकती हैं लेकिन उनके जीवन के जो उतार चढ़ाव रहे हैं, वो उन्हें एक ऐसी जीवट वà¤

विज्ञान के नाम पर आस्था और मिथक का खेल
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July 3, 2026

कुमार नरेन्द्र सिंह पिछले कुछ दशकों से  'इंडियन नॉलेज सिस्टम' (आईकेएस) नाम का एक प्रोजेक्ट पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। इस बात सà¥

एक अनजाने कलाकार अफ़ज़ल की पेंटिंग से फूटती रोशनी
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July 1, 2026

क्या आपने कोई ऐसी पेंटिंग देखी है जिसके भीतर से कोई तेज रोशनी फूटती हो...लगता है चित्र के फ्रेम के भीतर कोई बल्ब जल रहा हो।  त्रिवेणी कला संगम की गैलरी में देवास के दिवंगत चित्रकार अफ़ज़ल पठान के चित्रों को देखकर ऐसा लगता है कि उनकी पेंटिंग से कोई रोशनी निकल रही

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