जीडीपी पर एंकर का इतिहास ज्ञान – मिर्ची खा क्यों रहे हो …?
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September 5, 2026

समसामयिक सवालों पर अपनी तीखी नज़र डालने वाले रचनाकार आलोक यात्री ने देख तमाशा दुनिया का कॉलम की शुरुआत की थी... कुछ साल पहले तक लगातार आलोक यात्री ने इस सिलसिले का बरकरार रखा.. फिर इसे आगे बढ़ाने का काम किया अनिल त्रिवेदी ने... और अब एक बार फिर आपके सामने है आलोक यात्री की ताज़ा रचना... देश की मुख्यधारा की मीडिया कहे जाने वाले चैनलों और उनके महान एंकरों के

सतीश आनंद ने बदला पटना का रंगमंच और रंग बोध
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August 30, 2026

सतीश आनंद का जाना बेशक हिन्दी रंगमंच और खासकर पटना और बिहार के रंगमंच के लिए एक बड़ा शून्य पैदा करता है... बेशक तीश आनंद ने उस दौर में पटना में रंगमंच को एक नई दिशा दी और रंगकर्मियों को एक बड़ा मंच दिया जब साहित्य संस्कृति और खासकर रंगमंच एक मुश्किल दौर में था, दर्शकों को मंच तक लाना एक चुनौती थी और इसे समाज से जोड़कर एक सार्थक मिशन की तरह आगे ले जाना भी आसान नहीं था.. वो दौर था जब कालीदास

पटना में शिवपूजन सहाय की याद- ‘देहाती दुनिया’ के सौ साल
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August 11, 2026

'शिवपूजन सहाय का उपन्यास देहाती दुनिया बिहार के औपनिवेशिक गाँव का एक सामाजिक सांस्कृतिक दस्तावेज़ है'   पटना 11 अगस्त। आचार्य श

गंदी गालियां, अच्छी गालियां
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August 5, 2026

देख तमाशा दुनिया का... हमारे इस खास सेग्मेंट में इस बार वरिष्ठ पत्रकार और व्यंग्यकार अनिल त्रिवेदी ने गालियों पर छिड़ी दिलचस्प बहसों और सियासत पर अपने निशाने पर ले रहे हैं .. तो पढ़िए उनका ये दिलचस्प व्यंग्य --

चाय की दुकान पर चर्चा छिड़ी है। बहस के लिए रोज कोई न कोई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दा मिल ही जाता है। गांव से लेकर दिल्ली की राजनीति तक और गल

बगल के कमरे में कोई पिट रहा है!
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August 4, 2026

अरुंधति रॉय अगर कुछ लिखती हैं तो उसके कुछ मायने होते हैं... बेशक उनका लेखन उनके निजी जीवन और अनुभवों से फूटने वाली वह अभिव्यक्ति है जो सीधे सीधे मौजूदा समाज और रिश्तों की जटिलताओं के साथ साथ समकालीन राजनीति और खासकर कट्टरवादी सियासत करने वालों पर चोट करती है... ज़ाहिर है दक्षिणपंथी ताकतों की नज़र में वो हमेशा खटकती हैं लेकिन उनके जीवन के जो उतार चढ़ाव रहे हैं, वो उन्हें एक ऐसी जीवट व

विज्ञान के नाम पर आस्था और मिथक का खेल
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July 3, 2026

कुमार नरेन्द्र सिंह पिछले कुछ दशकों से  'इंडियन नॉलेज सिस्टम' (आईकेएस) नाम का एक प्रोजेक्ट पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। इस बात स

एक अनजाने कलाकार अफ़ज़ल की पेंटिंग से फूटती रोशनी
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July 1, 2026

क्या आपने कोई ऐसी पेंटिंग देखी है जिसके भीतर से कोई तेज रोशनी फूटती हो...लगता है चित्र के फ्रेम के भीतर कोई बल्ब जल रहा हो।  त्रिवेणी कला संगम की गैलरी में देवास के दिवंगत चित्रकार अफ़ज़ल पठान के चित्रों को देखकर ऐसा लगता है कि उनकी पेंटिंग से कोई रोशनी निकल रही

आशुतोष राणा कराएँगे देश के मशहूर मंदिरों के दुर्लभ दर्शन
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July 1, 2026

अयोध्या इन दिनों एक बार फिर ख़ासी चर्चा में है... राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट.. कहावत तो आपने सुनी ही होगी। तो साहब, राम के नाम पर पहले सत्ता और अब उनके नाम पर कई हज़ार करोड़ रुपए की चोरी.. मुद्दा गरम है, लेकिन इसी बीच राम की इसी आस्था का एक बेहद आधुनिक तकनीक से लैस व्यावसायिक अभियान भी सामने आया है... खासकर उनके लिए जिनके भीतर शायद मंदिर के दर्शन करने की चाहत है, लेकिन वो इस राजनीतिक

ओह ! एक बार फिर ‘शिट’
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June 30, 2026

राम मंदिर में करोड़ों की चंदा चोरी और चोर हुए चंपत, इसे चोरी कहें या डकैती... ऐसे में जांच के लिए एक और एसआईटी... सियासत का ये नया खेल, क्या है ये एसआईटी...जाने माने पत्रकार और व्यंग्यकार अनिल त्रिवेदी

चूंचूं अंकल इनदिनों गुमसुम हैं। मन बहुत उद्गिन और व्यथ

‘फ्री’ का फंडा, ‘सेल’ का खेल
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June 7, 2026

खुले बाजार का दौर है। आजकल हाल यह है कि बेचने वाले ग्राहक खोज-खोजकर माल थमाने में लगे हैं। बड़ा टफ कंपटीशन है, भाई। ग्राहकों को घर-घर जाकर पकड़ना पड़ रहा है। लोगों को नींद से जगा-जगाकर माल बेचा जा रहा है। बेचने वाले बताते हैं कि भैया उठो, खरीद लो और तब तक न रुको जब तक घर न भर जाए। जनता जनार्दन बेचारी झांसे में आ रही है और वह दिन-रात खरीदारी में जुटी है। विक्रेता समझा रहे हैं-मु

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